भाई आदिवासी आज भी मुर्गी मटण हि खाते है
मुर्गी मटन हमारा हजारो सालोसे खाना है
आप क्या आदिवासी को इतना गरीब समजते हो के वोह वो मेहमानो को उस्का पसंदीदा खाना नाही खिला सकता
उसके गरीबी कि मजाक मत उडाव
..
आप जिलबी फाफडा ढोकळा खाते हो ..
उसको राष्ट्रीय खाद्य बना दो .. — Dr.Jitendra Awhad (@Awhadspeaks) February 1, 2020
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